✴️ Introduction
दुनिया की सबसे कॉंट्रोवर्सियल बॉर्डर (Controversial Border) में से एक — ड्यूरंड लाइन (Durand Line) — सिर्फ एक जियोग्राफिकल बाउंड्री नहीं, बल्कि इतिहास, राजनीति और इंसानी रिश्तों का बँटवारा है।
लगभग 2,640 किलोमीटर लंबी यह लाइन आज भी अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच टेंशन की बड़ी वजह बनी हुई है।
1893 में बनी इस लाइन ने पश्तून (Pashtun) कम्युनिटी को दो देशों में बाँट दिया, जिससे न सिर्फ़ पॉलिटिकल कॉन्फ्लिक्ट, बल्कि परिवारों का अलगाव भी शुरू हुआ।
📜 ड्यूरंड लाइन का इतिहास – कैसे हुई शुरुआत?
19वीं सदी के बीच में, एशिया का सेंटर पॉइंट था — अफगानिस्तान।
उस वक्त दो बड़ी ताकतें — ब्रिटिश साम्राज्य और रूस — “द ग्रेट गेम (The Great Game)” नाम के भू-राजनीतिक मुकाबले में उलझी हुई थीं।
यह गेम असल में सेंट्रल एशिया पर कंट्रोल करने की रेस थी।
रूस की बढ़ती ताकत को रोकने के लिए ब्रिटिशों ने 1839 में अफगानिस्तान पर हमला किया, लेकिन पश्तून योद्धाओं ने उन्हें हरा दिया।
1878 में फिर से सेकंड एंग्लो-अफगान वॉर (Second Anglo-Afghan War) हुआ, और इस बार ब्रिटिशों ने अफगानिस्तान में अपना इन्फ्लुएंस बढ़ा लिया।
उन्होंने अब्दुर रहमान खान को अफगानिस्तान का रूलर बनाया और 1879 की गंदामक ट्रीटी (Gandamak Treaty) के जरिए अफगानिस्तान की फॉरेन पॉलिसी पर कंट्रोल हासिल किया।
🖋️ 1893 का ड्यूरंड एग्रीमेंट – जब एक लाइन ने सब बदल दिया
1893 में सर हेनरी मॉर्टिमर ड्यूरंड (Sir Henry Mortimer Durand) — जो ब्रिटिश इंडिया के फॉरेन सेक्रेटरी थे — और अफगान अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच एक ऐतिहासिक एग्रीमेंट (Durand Line Agreement) हुआ।
यह सिर्फ एक पेज का डॉक्यूमेंट था, लेकिन इसके असर आज तक महसूस किए जाते हैं।
इस समझौते के तहत ब्रिटिश इंडिया और अफगानिस्तान के बीच स्फियर्स ऑफ इन्फ्लुएंस (Spheres of Influence) तय किए गए।
1894 से 1896 के बीच इसका सर्वे किया गया और लाइन फाइनल हुई।
लेकिन इस लाइन ने पश्तून जनजातियों को दो हिस्सों में बाँट दिया —
एक हिस्सा अफगानिस्तान में और दूसरा ब्रिटिश इंडिया (जो बाद में पाकिस्तान बना) में चला गया।
यही वजह बनी कि आने वाले दशकों में पश्तूनिस्तान मूवमेंट (Pashtunistan Movement) और अफगान–पाक तनाव लगातार बढ़ता गया।
🏔️ ड्यूरंड लाइन का जियोग्राफी
ड्यूरंड लाइन का ईस्टर्न हिस्सा काराकोरम रेंज (Karakoram Range) के ऊँचे इलाकों में है, जबकि वेस्टर्न हिस्सा रेगिस्तान रेज़िस्तान (Registan Desert) में खत्म होता है।
यह लाइन 12 अफगान प्रांतों और 3 पाकिस्तानी प्रांतों से होकर गुजरती है।
अफगानिस्तान के प्रमुख प्रांत: नंगरहार, कंधार, हेलमंद, पकतिया, कुनार
पाकिस्तान के प्रमुख प्रांत: ख़ैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, ट्राइबल बेल्ट
इस रीजन में ख़ैबर पास (Khyber Pass) जैसी स्ट्रैटेजिक जगहें आती हैं, जो मिलिट्री और ट्रेड दोनों के लिए बेहद जरूरी हैं।
⚔️ ब्रिटिश राज के बाद क्या हुआ?
1947 में भारत के विभाजन (Partition) के बाद पाकिस्तान ने इस लाइन को अपनी ऑफिशियल इंटरनेशनल बॉर्डर माना,
लेकिन अफगानिस्तान ने इसे कभी एक्सेप्ट नहीं किया।
अफगान सरकार का कहना था कि ये एग्रीमेंट ब्रिटिश दबाव में हुआ था, इसलिए ये इनवैलिड (Invalid) है।
जब पाकिस्तान यूनाइटेड नेशंस (UN) में शामिल हुआ, तो अफगानिस्तान एकमात्र देश था जिसने इसके खिलाफ वोट दिया।
🔥 कोल्ड वॉर से लेकर तालिबान तक
1979 में सोवियत संघ (USSR) ने अफगानिस्तान पर इनवेज़न (Invasion) किया, और पाकिस्तान ने यूएसए (USA) के साथ मिलकर मुजाहिदीन (Mujahideen) फाइटर्स को सपोर्ट दिया।
इनमें से ज़्यादातर पश्तून ट्राइब्स के लोग थे, जो ड्यूरंड लाइन के दोनों ओर बसे थे।
1989 में सोवियत वापसी के बाद अफगानिस्तान में सिविल वॉर (Civil War) छिड़ गया और फिर तालिबान (Taliban) का राइज हुआ।
लेकिन चाहे कोई भी सरकार रही हो — अफगानिस्तान ने ड्यूरंड लाइन को कभी मान्यता नहीं दी।
2017 में पाकिस्तान ने बॉर्डर पर फेंसिंग (Fencing) शुरू की, जिससे दोनों देशों के बीच क्लैशेज़ (Clashes) और बढ़ गए।
आज यह बॉर्डर एरिया साउथ एशिया का सबसे टेंस और सेंसिटिव ज़ोन माना जाता है।
🧭 ड्यूरंड लाइन का ह्यूमन एंगल – जब सीमा ने रिश्ते बाँट दिए
ड्यूरंड लाइन सिर्फ एक पॉलिटिकल बाउंड्री नहीं — यह हजारों परिवारों की इमोशनल कहानी है।
कई पश्तून फैमिलीज़ (Pashtun Families) आज भी इस बॉर्डर के दोनों ओर रहती हैं — कुछ अफगानिस्तान में, कुछ पाकिस्तान में।
उनके रिश्तेदार, दोस्त, और फैमिली मेंबर्स बस कुछ किलोमीटर दूर हैं, लेकिन बॉर्डर पॉलिसीज़ की वजह से मिल नहीं पाते।
इस वजह से यह रीजन हमेशा से हाईली सेंसिटिव रहा है, जहाँ इमोशंस और पॉलिटिक्स दोनों साथ चलते हैं।
यह लाइन हमें याद दिलाती है कि मैप्स पर खींची गई एक रेखा, असल जिंदगी में रिश्तों और कल्चर को दो हिस्सों में बाँट सकती है।
🆕 अक्टूबर 2025 का ताज़ा अफगानिस्तान–पाकिस्तान संघर्ष
🔹 8 अक्टूबर 2025 से बढ़ा बॉर्डर टेंशन
8 अक्टूबर से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच नया संघर्ष शुरू हुआ।
पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने काबुल, खोस्त और पकतिया में एयरस्ट्राइक कीं, जिनका टारगेट पाकिस्तान तालिबान (TTP) का लीडर नूर वली मेहसूद (Noor Wali Mehsud) था।
अफगान सरकार ने इसे अपनी सीमाओं का उल्लंघन बताया और कहा कि इसमें आम नागरिक भी हताहत हुए।
🔹 10 से 12 अक्टूबर – भारी गोलीबारी और जवाबी हमला
11 और 12 अक्टूबर को ड्यूरंड लाइन के पास कई इलाकों में भारी फायरिंग और रॉकेट अटैक हुए।
अफगान पक्ष ने कहा कि उन्होंने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मारा, जबकि पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने 200 तालिबान लड़ाकों को खत्म किया।
दोनों देशों ने अपनी सीमा चौकियाँ (Border Posts) बंद कर दीं और टोरखम (Torkham) और चमन (Chaman) बॉर्डर क्रॉसिंग को सील कर दिया गया।
🔹 15 अक्टूबर – अस्थायी सीज़फायर और वार्ता
लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए 15 अक्टूबर को 48 घंटे का सीज़फायर (Ceasefire) घोषित किया गया।
कतर की राजधानी दोहा (Doha) में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता की तैयारी शुरू हुई।
संयुक्त राष्ट्र ने इस संघर्ष में नागरिकों की मौत पर चिंता जताई और स्थायी शांति की अपील की।
🔹 पाकिस्तान में आतंकी हमला
संघर्ष के बीच ही पाकिस्तान के बॉर्डर क्षेत्र में एक सुसाइड अटैक (Suicide Attack) हुआ जिसमें 7 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।
इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।
💥 क्यों मायने रखता है यह संघर्ष?
यह 2021 के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सबसे बड़ा मिलिट्री कॉन्फ्लिक्ट है।
इससे साफ है कि ड्यूरंड लाइन सिर्फ इतिहास की बात नहीं — बल्कि आज भी एक जीवित विवाद है जो हर समय भड़क सकता है।
यह घटना दिखाती है कि यह बॉर्डर सिर्फ नक्शे की एक रेखा नहीं, बल्कि एक ज्वलंत मुद्दा है जो राजनीति, सुरक्षा और मानवता तीनों को प्रभावित करता है।
🕊️ Conclusion
ड्यूरंड लाइन की कहानी सिर्फ एक सीमा की नहीं — यह इतिहास, राजनीति और इंसानियत की कहानी है।
1893 में खींची गई यह लाइन आज भी साउथ एशिया की पीस और स्टेबिलिटी के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
जब तक अफगानिस्तान और पाकिस्तान बातचीत से कोई स्थायी समाधान नहीं निकालते,
ड्यूरंड लाइन एक बॉर्डर से ज़्यादा — एक जख्म बनी रहेगी, जो हर पीढ़ी को दर्द महसूस कराती रहेगी।
❓1. ड्यूरंड लाइन क्या है?
उत्तर: ड्यूरंड लाइन 2,640 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अलग करती है। इसे 1893 में ब्रिटिश इंडिया और अफगान अमीरात के बीच खींचा गया था।
❓2. ड्यूरंड लाइन का नाम किसके नाम पर रखा गया है?
उत्तर: इसका नाम ब्रिटिश भारत के फॉरेन सेक्रेटरी सर हेनरी मॉर्टिमर ड्यूरंड (Sir Henry Mortimer Durand) के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने यह समझौता अब्दुर रहमान खान से करवाया था।
❓3. अफगानिस्तान ड्यूरंड लाइन को क्यों नहीं मानता?
उत्तर: अफगानिस्तान का कहना है कि यह सीमा ब्रिटिश दबाव में बनाई गई थी, इसलिए यह अवैध (Invalid) है। अफगानिस्तान आज भी पश्तून और बलूच इलाकों पर दावा करता है।
❓4. हाल ही में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच क्या हुआ है?
उत्तर: अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के बीच ड्यूरंड लाइन पर बड़ा संघर्ष हुआ। एयरस्ट्राइक, फायरिंग और सीमा पार झड़पों के कारण कई सैनिक और नागरिक हताहत हुए। बाद में 48 घंटे का सीज़फायर घोषित किया गया।
❓5. ड्यूरंड लाइन का अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लोगों पर क्या असर है?
उत्तर: इस लाइन ने पश्तून समुदाय को दो हिस्सों में बाँट दिया, जिससे कई परिवार और रिश्तेदार अलग-अलग देशों में रह गए हैं। यह क्षेत्र आज भी सबसे संवेदनशील और तनावपूर्ण माना जाता है।